यहां तक कि दिवाली की रात भी मंडियों में उपज की रखवाली में बिताई गई, बठिंडा के किसानों ने जताया अफसोस

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यहां तक कि दिवाली की रात भी मंडियों में उपज की रखवाली में बिताई गई, बठिंडा के किसानों ने जताया अफसोस

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धान की धीमी खरीद का आरोप लगाते हुए किसानों को अपनी उपज की रखवाली के लिए एक सप्ताह से अधिक समय से अनाज मंडियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन्होंने कहा कि उन्हें दिवाली की रात भी मंडियों में बितानी पड़ी। उन्होंने मंडियों में अपनी उपज की सुरक्षा की खराब व्यवस्था पर भी अफसोस जताया।

उपज को खरीदने तक उसकी रखवाली करनी होगी

बठिंडा जिले के संगत ब्लॉक के किसान गुरसेवक सिंह (अनुरोध पर बदला हुआ नाम) ने कहा, ‘मैं गुरुवार को 30 क्विंटल धान लाया था। नमी की स्वीकार्य सीमा के भीतर होने के बावजूद सरकारी एजेंसियों द्वारा इसकी खरीद नहीं की गई है। हमें अपने परिवार के साथ दिवाली भी नहीं मनाने का मौका मिला क्योंकि हमारी मेहनत की कमाई की सुरक्षा खतरे में है। उपज के ढेर खुले में पड़े हैं। बारिश के अलावा इसके चोरी होने का खतरा बना रहता है। आसपास चोरो का तादाद बढ़ गया है। वे देर रात हड़ताल करते हैं और खुले में पड़े ढेरों से धान की चोरी करते हैं। आवारा पशुओं को भी खुली छूट मिलती है। मंडी में कोई चौकीदार या पुलिसकर्मी नहीं है। हमें अपनी उपज को खरीदने तक उसकी रखवाली करनी होगी।

धान की चोरी के अलावा ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों के पार्ट्स भी चुरा रहे चोर

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बीर तालाब गांव के किसान हरजीत सिंह ने कहा, ‘करीब एक सप्ताह के इंतजार के बाद आज मेरा आधा धान खरीदा गया। यह सरासर किसानों का उत्पीड़न है। राज्य सरकार के इस दावे के विपरीत कि अनाज मंडियों में धान की खरीद तेज गति से चल रही है, जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। हमारी उपज की सुरक्षा सुनिश्चित करना तो दूर, मंडी में पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। चोर धान की चोरी के अलावा ट्रैक्टर और दोपहिया वाहनों के पार्ट्स भी चुरा रहे हैं।किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियों द्वारा उनकी उपज की जांच किए जाने के बाद, राइस मिलर उपज की खरीद नहीं करने का कारण धान की अधिक नमी प्रतिशत दिखाकर उन्हें परेशान कर रहे हैं।

प्रदेश महासचिव शिंगारा सिंह मान ने कहा…

बीकेयु एकता उग्राहां के प्रदेश महासचिव शिंगारा सिंह मान ने कहा, ‘हर मौसम में किसानों से बाजार शुल्क के रूप में करोड़ों रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन राज्य सरकार एक चौकीदार भी प्रदान नहीं कर सकती है जो मंडियों में उनकी उपज की रखवाली कर सके। इसके अलावा मंडी में लाए जाने के 24 घंटे के भीतर धान की खरीद किए जाने के सरकार के बड़े-बड़े दावे भी धराशायी हो गए हैं। राइस मिलर्स के कर्मचारियों की नाराजगी से किसानों को परेशानी हो रही है और उन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए अन्यथा हम आंदोलन शुरू कर देंगे।

फिर से मापने का कोई व्यवसाय नहीं

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जिला मंडी अधिकारी रजनीश गोयल ने कहा, “धान की खरीद में कोई देरी नहीं हो रही है, यह सिर्फ इतना है कि किसान अपनी उपज को चरणबद्ध तरीके से ला रहे हैं और तदनुसार इसकी खरीद की जा रही है। उपज की रखवाली के लिए मंडियों में चौकीदार हैं। अगर सरकारी एजेंसी ने नमी मीटर से नमी प्रतिशत मापा है और उपज को साफ कर दिया है, तो राइस मिलरों के पास इसे फिर से मापने का कोई व्यवसाय नहीं है, हम इस पर नजर रखेंगे।

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